1 अमीर लोग ज्यादा अमीर इसलिए बनते है और संसार की ज्यादा से ज्यादा चीजों को इसलिए आकर्षित करते है, क्योकि वे अपने मन में ईश्वर की असीमित दौलत का अहसास उत्त्पन्न कर लेते है। अमीर की निरन्तर और खुशगवार आशा हर प्रकार की संपन्नता को अपनी ओर आकर्षित करती है।
2 पर्तिस्पर्धा का विचार आपकी आपूर्ति को सीमित करता है। सृजनात्मक और सहयोग बने। यह अहसास करे कि आप किसी दूसरे का हिस्सा छीने बिना मनचाही सारी दौलत पा सकते है। जिस प्रकार हवा की कोई कमी नहीं होती है, उसी प्रकार सृष्टि की असीमित दौलत की भी कोई कमी नहीं है।
3 आप वही पहुंचते है, जहाँ आपका सपना होता है। अपनी मनचाही चीज का मानसिक चित्र देखते रहे और इसके पीछे प्रबल भावना रखे; यह अवश्य होगा।
4 अमीरी का अवरोध आपके दिमाग में होता है। दूसरो से ईर्ष्या अमीरी के आपके प्रवाह को रोक देगी और दुःख तथा अभवा को आकर्षित करेगी।
5 दूसरो को संपन्नता की दुआ देंगे तो आपको भी सम्पनता मिलेंगे। जो जहाज आपके भाई के पास आता है, वह आपके पास भी आता है।
7 आपका अवचेतन मन एक बैंक है। हो सकता है की आपके पास जरुरत या इच्छा को साकार करने के लिए कोई पैसा न हो, लेकिन आप अपनी मनचाही चीज का सटीक मानसिक चित्र बना सकते है और इसकी वास्तिवकता मसहूस कर सकते है। आपको यह जानने की कोई जरुरत नहीं है कि आपकी इच्छा किस तरीके से साकार होकर आपके जीवन में आएगी।
8 अपने सहकर्मियों को सफल और दौलतमंद बनते देखकर आनंदित हो। हर दिन प्रार्थना करे की ईश्वर की दौलत हर जगह सभी लोगों के दिलोदिमाग में सैलाब बनकर प्रवाहित हो रही है। जब कोई अमीर बने, जब किसी के घर का वैभव बढ़े तो इस बात से ने घबराएँ।








